दिल्ली से 15 हज़ार 775 किलोमीटर दूर,   संसार के 20 ताकतवर राष्ट्रों के देशअध्यक्ष एक दूसरे से मिल रहे हैं. ये सिलसिला प्रारम्भ हो चुका है. यहां ये समझ लीजिए कि G-20 क्या हैऔर इसमें शामिल राष्ट्र आपस में मिल कर क्या करते हैं?

G-20 का मतलब होता है Group of Twentyयानी एक ऐसा समूह जिसमें 19 राष्ट्र हैं  20वां सदस्य है European Union

इस Group में शामिल राष्ट्र वर्ष में एक बार  एक दूसरे से मिलते हैं. इन बैठकों में देश अध्यक्षों के अतिरिक्त इन राष्ट्रों के केंद्रीय बैंकों के गवर्नर भी शामिल होते हैं.

इस Summit में मुख्य रूप से संसार की आर्थिक स्वास्थ्य पर चर्चा होती है.

G-20 को समझने के लिए G-7 के बारे में भी जानकारी होना महत्वपूर्ण है.

1975 में संसार में एक आर्थिक संकट आया था  तब संसार के 6 बड़े राष्ट्रों ने एक साथ आने का निर्णय किया. ये राष्ट्र थे फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन  अमेरिका: एक वर्ष बाद Canada भी इसमें शामिल हो गया  इस तरह से G-7 की आरंभ हुई. 1998 में Russia इससे जुड़ गया  ये समूह G-7 से G-8 बन गया.

इसके बाद जून 1999 में जर्मनी में G-8 राष्ट्रों की मीटिंग हुई.  उस वक्त एशिया के आर्थिक संकट पर चर्चा की गई. जिसके बाद संसार भर की 20 सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने का निर्णय किया गया.  इसी के बाद G-20 वजूद में आया.

स्पैनिश भाषा में Buenos Aires (ब्युनोस आयर्स) का मतलब होता है, “Good Airs” या “Fair Winds”यानी अच्छी या शुद्ध हवाऔर आपको ये जानकर अच्छा लगेगा, कि इस बार G-20 Summit में संसार के सभी शक्तिशाली देशभारत की तरफ से आने वाली ‘शुद्ध हवा’ के इंतज़ार में बैठे हैं. इसकी वजह है, संसार की मौजूदा परिस्थिति.

उदाहरण के तौर पर अमेरिका  चाइना के बीच में Trade War चल रहा है. Russia  अमेरिका के संबंध भी अच्छे नहीं चल रहे हैं. यूक्रेन के मुद्दे पर ट्रम्प  पुतिन के बीच खींचतान चल रही है. चाइना जापान के संबंध भी पहले जितने मधुर नहीं हैं. जबकि दूसरी तरफ इन सभी राष्ट्रों के साथ हिंदुस्तान के संबंध ना सिर्फ मज़बूत हैं. बल्कि, New World Order की दिशा में हिंदुस्तान ने अपने मज़बूत कदम भी बढ़ा दिए हैं.

इस बार हिंदुस्तान के पीएम नरेंद्र मोदी, संसार के नेताओं के साथ दो जरूरी Tri-Lateral यानी त्रिपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे.

इन बैठकों में मुख्य रुप से संसार की मौजूदा चुनौतियों  घटनाओं पर विचार विमर्श किया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान, अमेरिका  हिंदुस्तान के बीच पहली बार त्रिपक्षीय मीटिंग में भाग लेंगे.

इसके अतिरिक्त Russia, हिंदुस्तान  चाइना के बीच भी 12 सालों के बाद त्रिपक्षीय मीटिंग होगी.

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump, जापान के पीएम शिन्जो आबे से मुलाकात करेंगे.  इसके बाद दोनों नेता संयुक्त रूप से पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग करेंगे.

Trump, Shinzo आबे  नरेंद्र मोदी के बीच ये मीटिंग ऐसे समय में हो रही है, जब South China Sea का टकराव उलझा हुआ है.

अब से थोड़ी देर पहले नरेंद्र मोदी ने चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है.  दोनों राष्ट्रोंके मज़बूत होते रिश्तों को  भी गहरा करने की बात कही है. इसके अतिरिक्त उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से भी मुलाकात की है. ईरान  सऊदी अरब के बीच के संबंधअच्छे नहीं हैं. जबकि भारत, दोनों ही राष्ट्रों के क़रीब है. इसलिए, इस बार G-20 Summit के दौरान, भारत ईरान  सऊदी अरब के बीच चल रहे टकराव को शांत करने की दिशा में पहल कर सकता है.

भारत जो भी कहता है, डंके की चोट पर कहता है.  आज पीएम नरेंद्र मोदी ने भी बिल्कुल वैसा ही किया है. दूसरे राष्ट्रों के देश अध्यक्षों के साथ Tri-Lateral मीटिंग्स का सिलसिला अब से थोड़ी देर बाद शुरु हो जाएगा. लेकिन, Buenos Aires (ब्युनोस आयर्स) में BRICS की अनौपचारिक मीटिंग के दौरान उन्होंने कड़े शब्दों में आतंकवाद का मुद्दा भी उठा दिया. यानी जो पाक कल तक हिंदुस्तान पर Googly फेंक रहा थाउसे हिंदुस्तान के पीएम ने ऐसा Bouncer मारा है, कि संभलने का मौका मिलना कठिन है.