कुलगाम (कश्मीर): इस राष्ट्र की खातिर जितने भी लोग शहीद हुए हैं उनके अलग-अलग किस्से हैं, लेकिन जम्मू व कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए जान गंवाने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी की कहानी सबसे अलग हैं नजीर अहमद वानी पहले आतंकी थे, लेकिन जब उन्हें इस बात का अहसास हुआ तो उन्होंने राष्ट्र विरोधी ताकतों से नाता तोड़ दिया इसके बाद वह फौज में शामिल होकर राष्ट्रसेवा में जुट गए चक अशमुजी गांव के निवासियों ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को अश्रुपूर्ण विदाई दी दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में एक मुठभेड़ के दौरान वानी शहीद हो गये जिसमें छह आतंकी भी मारे गये थे

सैनिक का पार्थिव बॉडी तिरंगे में लपेट कर कुलगाम में उनके पैतृक गांव अशमुजी लाया गया  उनके परिजनों को सौंपा गया ताबूत के साथ आये सेना के एक वरिष्ठ ऑफिसर ने बताया कि वानी शुरूआत में एक आतंकी था  हिंसा की निरर्थकता महसूस करने के बाद वह सेना में शामिल हो गया

अधिकारी ने बताया, ‘परिवार के आंसू रूक नहीं रहे हैं  उन्हें इस बात का गौरव है कि लांस नायक वानी के राष्ट्र  अपने राज्य की शांति के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया ’ रीति-रिवाजों के बाद मृत शरीरको दफनाने के लिए नजदीक के एक कब्रगाह ले जाया गया जहां 500 से 600 ग्रामीण मौजूद थे वानी को सुपुर्द ए खाक करते समय 21 तोपों की सलामी दी गई गांव कोनिमूह जैसे इलाकों से घिरा हुआ है जो आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात है

मौत पर शोक जताने के लिए उनके आवास पर ग्रामीण सोमवार प्रातः काल से जमा होने लगे थे वानी 2004 में प्रादेशिक सेना की 162 वें बटालियन में शामिल हुआ था रविवार को हुई मुठभेड़ के दौरान शहीद होने वाले वानी के परिवार में पत्नी  दो बच्चे हैं बच्चों की आयु 20  18 वर्ष है