दुनिया में प्यार ऐसी ताकत है जो मरते हुए शख्स में भी जीने की आस को जगा देता है। युगों से चली आ रही प्रेम कहानियां आज भी हमारे एहसासों के किसी तह में समर्पण, विश्वास और वचनबद्धता के पुल का निर्माण करती हैं।
प्रेम वह ऊर्जा है, जो न तो किसी परिस्थिति का आकलन करती है और न ही इसे किसी घड़ी की सुइयों में  क़ैद किया जा सकता है। बल्कि यह स्वतः अपने निर्मल प्रकाश से इस धरा को निरंतर पल्लवित, पुष्पित और फलित करती रहती है। कुछ ऐसी ही कहानी है, चीन के रहने वाले 85 साल के दू युअंफा की। उनकी कहानी एक पल के लिए मार्मिक ज़रूर है परंतु ठीक दूसरे ही पल इनके प्रेम की अनुभूति अपने आपमें विरल, अद्वितीय और बेजोड़ है।

समर्पण का सही अर्थ बताने वाले दू युअंफा पिछले 59 सालों से अपनी लकवाग्रस्त पत्नी की बिना थके और बेहद विनम्रता से सेवा करते चले आ रहे हैं। तो आइए आज उनके इस अद्वितीय नि:स्वार्थ प्रेम से रूबरू होते हैं।

चीन के शेडोंग प्रांत से ताल्लुक रखने वाले दू युअंफा, सुंजिययो गांव में अपनी पत्नी ज़ू यूआई के साथ रहते हैं। युअंफा अपनी पत्नी ज़ू के बिस्तरग्रस्त होने से पहले एक कोयले की खान में काम करते थे। उनके खुशहाल जिंदगी में साल 1959 किसी भूचाल की तरह आया। दरअसल, उनकी प्रिय पत्नी को एक अज्ञात बीमारी ने संक्रमित कर दिया, जिसके फलस्वरूप वे चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गईं। तब ज़ू यूआई 20 साल की एक नौजवान युवा थी।