नई दिल्ली : सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं जयंती पर उनकी 182 मीटर ऊंची विशालकाय प्रतिमा का अनावरण कर दिया है गुजरात के केवड़ि‍या में बनी संसार की सबसे ऊंची प्रतिमा को रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है यह प्रतिमा मातृभूमि की एकजुटता का प्रतीक है इसकी ऊंचाई का अंदाजा आप ऐसे भी लगा सकते हैं कि यह प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुनी ऊंची है

महाराष्ट्र गवर्नमेंट बनवा रहीं छत्रपति शिवाजी का स्टेच्यू
को नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के पास साधु बेट टापू पर बनाया गया है आज संसार की सबसे ऊंची मूर्ति के पास यह खिताब अगले तीन वर्ष ही रह सकता है इसके बाद हिंदुस्तान में ही बन रही एक अन्य मूर्ति इस रिकार्ड को तोड़कर संसार की सबसे ऊंची मूर्ति बन जाएगी इसे गुजरात गवर्नमेंट ने बनवाया है, दूसरी तरफ महाराष्ट्र गवर्नमेंट करीब 3800 करोड़ रुपये की लगात से छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल का निर्माण करा रही है

एलएंडटी के पास दोनों मूर्तियों के निर्माण का ठेका
के निर्माण पर अब तक 2300 करोड़ रुपये की लागत आ चुकी है हालांकि बोला जा रहा है कि लागत बढ़कर 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है  छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल को बनाने का ठेका लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को मिला है मुंबई में अरब सागर के अंदर बन रहे छत्रपति शिवाजी महाराज मेमोरियल या शिवा स्मारक को जल्द ही संसार के सबसे ऊंचे स्टैच्यू का खिताब मिल जाएगा

शिवा स्मारक की ऊंचाई 190 मीटर
शिवा स्मारक की ऊंचाई 190 मीटर है, जबकि 182 मीटर ऊंचा है हमारी सहयोगी वेबसाइट   के अनुसार शिवा स्मारक समिति के अध्यक्ष विनायक मेटे ने बताया है कि शिवा जी का स्टैच्यू संसार में सबसे ऊंचा होगा हालांकि बेस को मिलाने पर की ऊंचाई अधिक होगी इसके अतिरिक्त में सरदार पटेल की सीधी खड़ी मूर्ति है, जबकि शिवा स्मारक की मूर्ति में घोड़े  तलवार की ऊंचाई को भी जोड़ा गया है

एक म्यूजियम, थियेटर  अस्पताल भी होगा
शिवा स्मारक में शिवाजी की मूर्ति के अतिरिक्त एक म्यूजियम, एक थियेटर  एक अस्पताल भी होगा तय कार्ययोजना के मुताबिक ये स्मारक 2021 में बनकर तैयार हो जाएगा इस तरह के पास संसार की सबसे ऊंची मूर्ति होने का खिताब सिर्फ तीन वर्ष रहेगा हालांकि अभी शिवा स्मारक के डिजाइन को लेकर कुछ पर्यावरणविदों ने असहमति जताई है  ये इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ही तय होगा कि संसार की सबसे ऊंची मूर्ति का खिताब किसे मिलता है  ये खिताब चाहें जिसे भी मिले, इसमें कोई संदेह नहीं कि हिंदुस्तान को इन दोनों स्मारकों पर गर्व होगा