जयपुर: देश में इस समय विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां जोर आजमाइश कर रही हैं.जानकारी के अनुसार बता दें कि राजस्थान में 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव में 200 में से 61 सीटों पर त्रिकोणीय  11 सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति बनती दिख रही है. यह स्थिति तीसरे मोर्चे की पार्टियों  दोनों दलों के दमदार बागियों और अन्य निर्दलियों के कारण नजर आ रही है. वही क्षेत्रवार देखें तो मुख्य मुकाबले मे नजर आ रहे बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के लिए उत्तरी राजस्थान दक्षिणी राजस्थान में तीसरे मोर्चे की पार्टियों से चुनौती ज्यादा मिल रही है. बाकी स्थान या तो निर्दलीय है.

यहां बता दें कि राजस्थान में टिकट वितरण  नाम वापसी के बाद यूं तो 200 सीटों के लिए 2294 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं  भाजपा, कांग्रेस पार्टी के अतिरिक्त बहुजन समाज पार्टी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी, इंडियन कम्युनिस्ट पार्टी, आम आदमी पार्टी  लोकल दलों की बात करें तो जमींदारा पार्टी, हिंदुस्तान वाहिनी पार्टी  राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जैसे कई दल चुनाव मैदान में है, लेकिन त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबला करीब 72 सीटों पर ही दिख रहा है. बाकी स्थान बीजेपी  कांग्रेस पार्टी या कांग्रेस पार्टी के सहयेागी दल आमने सामने के मुकाबले में है.

वहीं राजस्थान में तीसरे मोर्च की पार्टियों का कोई साझेदारी नहीं बन पाया है. हालांकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी  कुछ दलों ने मिल कर लोकतांत्रिक मोर्चा बनाया जरूर है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी  सबसे दमदार मौजूदगी दिखा रहे हनुमान बेनीवाल, घनश्याम तिवाड़ी के दल  जमींदारा पार्टी इस लोकतांत्रिक मोर्चो से बाहर है. यही कारण है कि तीसरा मोर्चा बिखरा हुआ है. तीसरे मोर्चे की यह पार्टियां प्रदेश के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ, झुझुनूं, चूरू, सीकर, बीकानेर, आदि जिलों में ज्यादा प्रभाव दिखा रही है  इन जिलों की करीब 20 सीटें सीधे तौर पर इन दलों  निर्दलीयों के कारण प्रभावित हो रही है.