सीधी बात में राहुल गांधी के अगले चुनाव की तैयारियों और बतौर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा कि कभी भी राहुल गांधी ने नहीं कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करिए. डीएमके ने राहुल को प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित करने की बात रखी है. लेकिन कांग्रेस और सहयोगी संगठनों ने आपस में तय कर रखा है कि चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मिल-बैठकर प्रधानमंत्री तय करेंगे.

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सचिन पायलट ने सीधी बात में कहा कि हमारी नीयत और नीति दोनों ही स्पष्ट है. देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव सिद्धांतों और मुद्दों पर लड़े जाएंगे, साथ ही चुनाव में जीत हासिल करने के बाद सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री पर फैसला करेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक होकर बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया है. 2019 में मोदी सरकार फिर से सत्ता में नहीं लौट पाएगी.

आजतक के खास कार्यक्रम सीधी बात में राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद उपमुख्यमंत्री पद पर काबिज होने वाले सचिन पायलट ने मध्य प्रदेश की तर्ज राज्य के प्रदेश होने के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बनने पर कहा कि पढ़े-लिखे युवा वर्ग से जितने ज्यादा लोग राजनीति में आएंगे, वो शुभ संकेत है राजनीति के लिए. हर प्रदेश की राजनीति अलग है. मध्य प्रदेश में जो फैसला लिया गया वो वहां की राजनीति के आधार पर लिया गया है. राजस्थान में लिया गया फैसला हर किसी के और प्रदेश के हित में है. प्रदेश में हम सबने मिलकर निर्णय लिया है कि आने वाले समय में हम कैसे राज्य को बेहतर सरकार दें.

‘CM के साथ कोई मनमुटाव नहीं’

उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर चेहरे पर दुख का कोई भाव नहीं दिखने पर पायलट ने कहा, ‘किस बात का दुख. मैं इस बात का आभारी हूं कि पार्टी ने मुझे इस काबिल समझा. पार्टी ने इस बड़े प्रदेश की अहम जिम्मेदारी दी है तो मेरी कोशिश है कि उसका सही तरीके से निर्वहन किया जाए. हम अच्छी सरकार देने की कोशिश करेंगे.’ राज्य मंत्रिमंडल के लिए दिल्ली पर निर्भरता के बारे में उन्होंने कहा कि यह पहले से ही होता रहा है और अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष ही करता है. राज्य के मुख्यमंत्री के साथ कोई मनमुटाव नहीं है. राज्य में जीत के लिए हर किसी को श्रेय जाता है.

अगले आम चुनाव से पहले 4 महीने के मिले समय पर सचिन पायलट ने कहा कि सरकार की जो मंशा है वो शुरू-शुरू में दिख जाती है. हम बड़े-बड़े महलों में रहकर जनता से दूर रहकर काम करेंगे तो जनता उसे स्वीकार नहीं करेगी, लेकिन हमारी नियत, काम करने का तरीका और हमारा बर्ताव और सरकार की पॉलिसी यह सब कुछ निर्भर करती है कि इसे किस तरह से किया जाता है. काम करने वाले बाबू तो वही रहेंगे, लेकिन निर्भर करता है कि इनसे काम कैसे लिया जा सकता है. मध्य प्रदेश में अधिकारियों के तबादले पर उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बदलाव तो जरुरी है, लेकिन काम करने का तरीका अहम है कि उनसे कैसे काम लिया जा सकता है. राज्य में पार्टी की लगातार जीत पर उन्होंने कहा कि हमने एकजुट होकर काम किया और यही कारण है कि हमें लगातार जीत मिली.

जीत के बाद तय होगा नेता

राहुल गांधी के अगले चुनाव की तैयारियों और बतौर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा कि कभी भी राहुल गांधी ने नहीं कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करिए. डीएमके ने राहुल को प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित करने की बात रखी है. लेकिन कांग्रेस और सहयोगी संगठनों ने आपस में तय कर रखा है कि चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मिल-बैठकर प्रधानमंत्री तय करेंगे. जीत के बाद ही तय होगा कि गठबंधन का नेता कौन होगा.

उन्होंने कहा कि पिछले करीब 30 सालों से गांधी परिवार से कोई भी प्रधानमंत्री नहीं बना, मुख्यमंत्री नहीं बना. हर कोई पार्टी के लिए काम करता है और आज का हमारा संघर्ष सत्ता हासिल करने के लिए नहीं है. व्यवस्था को परिवर्तित करने के लिए है क्योंकि बीजेपी ने आज देश में जो माहौल बनाया है वो अच्छे संकेत नहीं हैं. हम चुनाव मुद्दों और सिद्धांतों पर लड़ रहे हैं. सबको साथ लेकर लड़ रहे हैं. अगर संविधान और देश के संवैधानिक संगठनों को नुकसान पहुंचता है तो यह देशहित में नहीं होगा.

संगठनों का विश्वास नहीं तो जनता का विश्वास कैसे

सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी में यह बड़ी बात है कि हम सबको साथ लेकर चलते हैं. एनडीए में लगातार टूट हो रहा है, अभी हाल में उपेंद्र कुशवाहा ने दामन छोड़ दिया है. शिवसेना और टीडीपी ने भी साथ छोड़ दिया है. शिवसेना ने साथ छोड़ा ही हुआ है आप देख लेना. जो लोग अपने सहयोगी संगठनों का विश्वास नहीं पा सकते, वो देश की जनता का विश्वास कैसे हासिल कर सकते हैं. इनका समय आ गया है. अगले साल चुनाव में यूपीए का जीतना तय है और इन 3 राज्यों के चुनावी परिणाम ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है.

3 राज्यों के चुनावी परिणाम के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व पर पायलट ने कहा कि निश्चित तौर पर लगता है, राहुल गांधी ने तीनों राज्यों में हमारे चुनावी अभियान को शुरू किया. उन्होंने आक्रामक होकर बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया है. उनके नेतृत्व में हमने तीनों राज्यों में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. उनके विरोधियों और आलोचकों को मानना पड़ेगा कि राहुल गांधी ने साबित कर दिया कि तमाम पैसा और ताकत होने के बावजूद उन्होंने यहां पर जीत हासिल की.

राहुल गांधी के हिंदूत्ववादी नेता बनने पर पायलट ने कहा कि राहुल ने हमेशा भ्रष्टाचार, मंहगाई, किसानों के मुद्दे आदि पर फोकस रखा है. बीजेपी जाति-धर्म की राजनीति की है. कांग्रेस ने कभी भी धर्म की बात नहीं की. कांग्रेस ही एकमात्र दल है जो सभी को एक साथ लेकर चलती है. उन्होंने कहा कि एनडीए को हराने के लिए सभी विपक्षी संगठनों को एकजुट होना पड़ेगा.