पाकिस्तान ने अपनी National Space Agency का गठन साल 1961 में किया था.  इन 57 सालोंके दौरान, अगर पाक ने आतंकियों की सेवा छोड़कर, राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य किया होता, तो आज उसे अंतरिक्ष में अपना नागरिक भेजने के लिए चाइना से मदद ना लेनी पड़ती वैसे, ध्यान देने वाली बात ये है, कि हिंदुस्तान ने भी साल 2022 में ही अपना पहला मानव मिशन Launch करने का Plan बनाया है इसलिए आप ये भी कह सकते हैं, कि पाक अपने बड़े भाई चाइना के साथ मिलकर, अंतरिक्ष की संसार में हिंदुस्तान को मुक़ाबला देने की फिराक में है लेकिन, ये मुक़ाबला कम मज़ाक ज़्यादा लगता है

दिलचस्प बात ये है, कि हिंदुस्तान की स्पेस एजेंसी ISRO का गठन, पाक की स्पेस एजेंसी के गठन के 8 वर्ष बाद, यानी साल 1969 में हुआ था लेकिन, आज Indian Space Research Organisation, अंतरिक्ष की संसार की बहुत बड़ी शक्ति बन चुका है जबकि, पाक की स्पेस एजेंसी SUPARCO. ISRO के सामने कहीं नहीं ठहरती

पाक को अपने Satellite Launch करने हों, तो वो चाइना के पास जाता है, जबकि दूसरी तरफ जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जापान  फ्रांस जैसे राष्ट्र अपने Satellite की Launching के लिए ISRO के पास आते हैं Google जैसी बड़ी कंपनी भी अपने Satellites के Launch के लिए हिंदुस्तान की स्पेस एजेंसी पर ही आश्रित है 1970 के दशक में ISRO ने अपनी तकनीक  क्षमता को मज़बूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए थे इसी का नतीजा था, कि ISRO ने अपने गठन के अच्छा 6 वर्षके अंदर हिंदुस्तान का पहला Satellite, Aryabhatt-1, Launch कर दिया था इसके बाद ISRO धीरे-धीरे कामयाबी की बुलंदियां चढ़ता चला गया

जबकि दूसरी तरफ पाक की गवर्नमेंट का ध्यान, अपनी स्पेस एजेंसी को छोड़कर, परमाणु बम बनाने की दिशा में चला गया  स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों  पूरी Technology को, इसी कार्य में झोंक दिया गया सबसे दिलचस्प बात ये है, कि पाक की स्पेस एजेंसी के चेयरमैन का नाम है, मेजर जनरल क़ैसर अनीस खुर्रमयानी इस स्पेस एजेंसी की कमान किसी वैज्ञानिक के पास नहींबल्कि सैन्य ऑफिसर के पास है ज़ाहिर है ऐसे में पाक की स्पेस एजेंसी परमाणु बम का विकास नहीं करेगी तो क्या करेगी

एक तथ्य ये भी है, कि ISRO के पास फिल्हाल जिस प्रकार की तकनीक  काबिलियत है, उसतक पहुंचने के लिए पाक को कम से कम 20 साल  लगेंगे  तबतक अंतरिक्ष की संसार में हिंदुस्तानबहुत आगे निकल चुका होगा