एक कहानी २६/११ के उस हीरो की जो जय हिंद की सेना में न होकर भी एक सौ सत्तावन लोगों की जान बचाने में कामयाब हो गया…

ये कहानी है रवि धर्निधिरका की… रवि अमेरिकी नेवी का हिस्सा थे… वह एक ऑपरेशन के लिए चार साल ईराक में भी रह चुके थे… इतना ही नहीं रवि ने दो हजार चार में फलुजा की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था… रवि उन दिनों भारत आए हुए थे… २६/११ को रवि अपने अंकल से मिलने होटल ताज के लेबनानी रेस्टां ‘सुक’ में पहंचे… रवि जब होटल ताज के अंदर पहुंचे तो वो हैरान रह गए…

रवि ये सोच रहे थे कि इतने बड़े होटल में सुरक्षा के लिए कोई कड़ा इंतजाम क्यों नहीं है… रवि ने होटल के एंट्रेंस पर एक बात नोट की थी… उन्होंने देखा कि जब वह मेटेल डिटेक्टर से होकर निकले तो वह काम नहीं कर रहा था… इस बात से वहां बैठे सुरक्षाकर्मी को कोई फर्क भी नहीं पड़ रहा था… रवि कुछ देर वहां खड़े रहे तब उन्हें पता चला कि मेटेल डिटेक्टर काम ही नहीं कर रहा है… खैर रवि होटल की बीसवीं मंजिल पर चले गए जहां पर उनका इंतजार उनके अंकल कर रहे थे…

रवि अपने अंकल के साथ बैठे ही थे कि अचानक से रेस्टां में बैठे बहुत सारे लोगों के फोन एक साथ बजने लगे… रवि के अंकल के पास भी एक फोन आया… कुछ ही देर में सबको पता चल चुका था कि मुंबई में आतंकी हमला हो गया है… लोगों के पास ख़बर तेजी से आने लगा… रवि और उनके बगल बैठे लोग अभी पता ही लगा रहे थे कि तभी होटल के अंदर चीख पुकार मचने लगी…

उन्हें ये समझने में देर नहीं लगी कि होटल के अंदर आतंकी घुस आएं है… रवि तुरंत खड़े हुए और वहां मौजूद लोगों को बताने लगे कि अब उन्हें खुद बचकर निकलना होगा… रवि की नज़र रेस्टां के एक दरवाजे पर पड़.. दरवाजा कांच का बना हुआ था… दरअसल उन लोगों ने रेस्टां का दरवाजा तो बंद कर दिया था लेकिन दरवाजे के उस तरफ से आतंकवादी उन लोगों पर ग्रेनेड फेंक सकते थे… रवि ने वहां मौजूद सभी लोगों को दूसरे हॉल में चलने के लिए कहा… रवि तेजी से लोगों को लेकर हॉल के अंदर घुस गए… हॉल का दरवाजा अंदर से लगा दिया गया.. दरवाजे के पास सोफे भी लगा दिए गए थे ताकि आसानी से कोई अंदर न आ सके…

रवि समय-समय पर खिड़की से बाहर देख रहे थे ताकि पता चल सके कि बाहर हो क्या हो रहा है… कुछ ही देर में होटल की छठी मंजिल पर दो धमाके हुए… वहां बुरी तरह से आग लग चुकी थी… रवि ने सोचा कि अगर ये लोग यहीं फंसे रह गए तो हो सकता है कि शॉट सर्किट हो जाए और बीसवीं मंजिल पर भी आग लग जाए… रवि कोई गलत फैसला नहीं लेना चाहते थे, इसलिए उन्होंने हॉल में मौजूद लोगों से कहा…’सेना हमें बचाने आ रही है, लेकिन वो कब तक यहां पहुंचेगी ये नहीं पता’ लोग रवि को ध्यान से सुन रहे थे.. रवि ने आगे कहा- ‘नीचे आग लग चुकी है… हमें पीछे की सीढ़ियों से भागना होगा… रवि नेवी के कई खौफनाक ऑपरेशन का हिस्सा रह चुके थे… लेकिन एक साथ बिना हथियार के इतने लोगों को बचाना ये रवि ने कभी नहीं किया था…

रवि ने तेजी से एक रणनीति बनाई… उन्होने कुछ पूर्व सेना के कुछ अधिकारियों से आगे चलने को कहा… ताकि वह इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों और महिलाओं को कई खतरा न हो… ऐसा ही हुआ… सबसे आगे पूर्व अधिकारी फिर पुरुष और महिलाएं और बच्चे हॉल पूरी तरह से खाली हो चुका थ.. पीछे की सीढ़ियों से होकर एक सौ सत्तावन लोग नीचे भाग रहे थ.. उन सभी लोगों को खासतौर से रवि ने कहा था कि जूतें उतार कर भागें और अपने मोबाइल फोन भी ऑफ कर लें… ऐसा ही हो रहा था… हॉल में आखिर में रवि अकेले बचे थे… अब वह भी नीचे की तरफ भागने जा रहा थे…

इतने में ही उन्होंने देखा कि हॉल के कोने में एक बूढ़ी महिला बैठी हुई थ…वो महिला वील चेयर पर बैठी हुई थी… रवि ने कहा कि आपको नीचे चलना होगा… लेकिन महिला चलने में अक्षम थीं.. उन्होंने रवि से कहा कि तुम मुझे छोड़कर चले जाओ जो होगा देखा जाएगा..लेकिन रवि उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते थे… रवि ने महिला को अपनी गोद में उठा लिया और तेजी से नीचे उतरने लगा… लेकिन बीस मंजिल किसी महिला को अपनी गोद में लेकर उतरना आसान नहीं था… लेकिन रवि ने हार नहीं मानी… वहीं नीचे आ चुके लोगों की निगाहें रवि पर टिकीं हुई थी… लोगों ने देखा की रवि एक बूढ़ी महिला को गोद में लेकर आ रहे हैं… रवि कि बहादुरी, हिम्मत और समझदारी से एक सौ सत्तावन लोगों की जान बच गई.. रवि इन लोगों के लिए हीरो बन चुके थे…

रवि की कहानी पढ़कर बस एक ही ख्याल आता है जहन मे, “एक सोल्जर कभी छुट्टी नहीं लेता”..
ये देश की माटी का ही कमाल है शायद, कि इसमें सैनिक चाहे किसी भी देश की सेना में हो पर फर्ज नहीं भूलता..