भारत में नौसेना की बात की जाए तो इसके प्रमाण बहुत पुराने हैं। सिंद्धु घाटी सभ्यता में भी नावों के प्रमाण मिलते हैं। हालांकि कार्यकारी तौर पर आधुनिक भारतीय नौसेना का गठन ब्रिटिश काल में हुआ। सन् 1613 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के दौरा इंडियन मेरीन के नाम से इसकी शुरुआत की गई और कालांतर में इसका नाम भी बदला।

सन 1947 में जब देश को आज़ादी मिली और साथ ही देश दो टुकड़ों में बट गया टब इस बटवारे की शर्तों के मुताबिक एक तिहाई भारतीय नौसेना पाकिस्तान के पास चली गई और भारत के पास नाम मात्र की नौसेना बची थी। हालांकि भारत ने आज़ादी के बाद तुरंत अपनी नौसेना को बढाया और विदेशों से कई नौसैनिक महत्व के साजो सामान खरीदे।

बहरहाल आज़ादी के 25 साल के अन्दर अन्दर एक ऐसा मौका आया जब देश की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की सर्वाधिक आवश्यकता पड़ी और भारतीय नौसेना ने भी देश को निराश ना करते हुए दुश्मन को नाको चने चबवा दिए। जी हाँ हम बात कर रहे हैं सन 1971 के आखिर में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध की जिसमे भारतीय नौसेना ने महज कुछ घंटों में पाकिस्तान के अन्दर कोहराम मचा दिया था।

दरअसल हुआ यूँ की 3 दिसंबर के दिन अचानक पाकिस्तान ने कई भारतीय शहरों पर हवाई हमला बोल दिया था। बहरहाल इस हमले को काउंटर करने के लिए भारत ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ शुरू किया और इस ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने 4 दिसंबर 1971 के दिन पाकिस्तान स्थित करांची के नौसैंक ठिकानों पर जबरदस्त हमला बोला और पाकिस्तान के तीन जहाजों को नेस्‍तनाबूद कर दिए। इस दौरान भारतीय हमले से करांची के तेल डिपो में भयानक आग लगी जो लगातार 7 दिनों तक बुझ नहीं पाई। इस हमले के बाद पाकिस्तान कभी सम्हाल नहीं पाया और जमीनी लड़ाई के मोर्चे पर भी जल्द ही घुटने टेक दिए थे।

भारतीय नौसैनिकों की इसी आदमी सफलता के दिन को भारतीय नौसेना दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। बता दें की इसी युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी गाजी को भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम के पास मार गिराया था।