डेढ़ दशक बाद मध्यप्रदेश  छत्तीसगढ़ में सत्ता की दहलीज तक पहुंची कांग्रेस ने इन दोनों राज्यों के मंत्रिमंडल गठन में पूरी सावधानी बरती है. 2019 में लोकसभा की 40 सीटों पर फोकस करते हुए कांग्रेस पार्टी ने सभी वर्गों को साथ लेकर एक संतुलित मंत्रिमंडल के गठन की ओर कदम बढ़ाया है.एमपी में लोकसभा की 29  छत्तीसगढ़ में 11 सीटें हैं.

मंत्रिमंडल गठन में बुजुर्ग नेताओं को अच्छी-खासी स्थान देकर यह संदेश देने का कोशिश किया है कि कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेताओं को किनारे नहीं करती. साथ ही युवा नेताओं को भी मंत्रिमंडल में स्थानदेकर बता दिया है कि वे पार्टी का ‘कल’ हैं. एमपी मंत्रिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को सर्वाधिक तरजीह मिली है, इससे साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी आलाकमान की नजर में वे आज भी टाइगर हैं.

मध्यप्रदेश में मंगलवार को कमलनाथ मंत्रिमंडल में 28 मंत्रियों को शामिल किया गया है.मालवा-निमाड़ से नौ विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान मिली है. ग्वालियर और चंबल इलाके से पांच मंत्री, बुंदेलखंड से तीन, महाकौशल से चार, मध्य से छह  विंध्याचल से एक विधायक को मंत्री बनाया गया है. टिकट बंटवारे से पहले और बाद में दिल्ली की राजनीतिक गहमागहमी से दूर रहे दिग्विजय सिंह के समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में भरपूर स्थान मिली है.

कांग्रेस पार्टी आलाकमान ने ऐसा कर उन नेताओं या धड़ों को बता दिया है कि दिग्विजय सिंह का असर आज भी सोनिया गांधी  राहुल गांधी की नजर में कम नहीं हुआ है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की 2019 में बड़ी किरदार रहेगी. प्रदेश की जनता में दिग्गी राजा का स्तर कितना है, इस मामले में पार्टी ने खुफिया सर्वे कराया था. इसमें जो नतीजे मिले, उसके बाद आलाकमान का रूख पूरी तरह बदल गया.

हालांकि पार्टी ने इस राज को वोटिंग तक जाहिर नहीं होने दिया. यही वजह रही कि पार्टी ने न केवल दिग्गी राजा के पुत्र जयवर्धन सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया, बल्कि कमलनाथ  सिंधिया के मुकाबले उनके समर्थकों को अधिक संख्या में मंत्री पद दिए गए हैं. पार्टी की रणनीति है कि दिग्विजय सिंह को जनता के बीच रखा जाएगा. एमपी के सभी वर्गों में उनका आज भी असर बताया गया है, इसलिए पार्टी उन्हें 2019 के लिए जल्द ही बड़ी ज़िम्मेदारी देने जा रही है.

मंत्री पद की शपथ लेने वाले पीसी शर्मा, सुरेंद्र सिंह बघेल, प्रदीप जायसवाल, लाखन यादव, गोविंद सिंह, आरिफ अकील  बृजेंद्र सिंह राठौर जैसे कई अन्य नेता हैं, जिन्हें दिग्गी राजा का करीबी माना जाता है. पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि CM कमलनाथ पहले की भांति रणनीतिकार की किरदार में रहेंगे. सिंधिया गुट को मंत्रिमंडल में सबसे कम स्थान मिली है. पार्टी 2019 के मद्देनजर सिंधिया की किरदार तैयार कर आगे बढ़ रही है.

बुजुर्गों के साथ राहुल की युवा टीम को भी तव्वजो

मंत्रिमंडल में गोविंद सिंह (67), बृजेंद्र सिंह (60), पीसी शर्मा (69), सज्जन सिंह (66)  हुकुम सिंह (62) को स्थान दी गई है तो वहीं तरुण भनौट (47), सुरेंद्र बघेल (41), उमंग सिंगार (44), जीतू पटवारी (45), ओमकार सिंह (42), प्रियव्रत (40)  जयवर्धन सिंह (32) जैसे युवा नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. पार्टी ने राजपूत, यादव, ब्राह्मण के अतिरिक्त दो स्त्रियों  एक मुस्लिम विधायक को भी मंत्री बनाया है.

छत्तीसगढ़ में भी संतुलित मंत्रिमंडल का गठन किया गया है. इसमें रविंद्र चौबे ब्राह्मण, प्रेमसाय टेकाम सरगुजा, मोहम्मद अकबर मुस्लिम, कवासी लखमा आदिवासी, अनिला आदिवासी समुदाय से सतनामी समाज के गुरु रूद्र कुमार आदि मंत्री बने हैं. रायपुर के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री श्यामा चरण शुक्ला के पुत्र अमितेश शुक्ला  मोतीलाल वोरा के पुत्र अरुण वोरा का नाम मंत्रियों की सूची में नहीं है. अरुण वोरा ने इस मामले में विरोध भी जताया है.

कांग्रेस के नेता  छत्तीसगढ़ मामलों के प्रभारी पीएल पूनिया का कहना है कि मंत्रिमंडल में सभी को उचित प्रतिनिधित्व मिला है. पार्टी कई लोगों को कुछ  जिम्मेदारी देगी. नाराज कोई नहीं है. अब हमारा कोशिश है कि छत्तीसगढ़ की सभी 11 लोकसभा सीटों पर खुद  भावी सहयोगियों की मदद से जीत दर्ज कराने की ओर बढ़ा जाए. कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में आक्रामक चुनाव लड़कर यह जीत हासिल की है. लोकसभा में भी हमारी ऐसी ही रणनीति रहेगी.