बांग्ला के मशहूर कवि नीरेंद्रनाथ चक्रवर्ती का कोलकाता के एक अस्पताल में मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वे 94 वर्ष के थे. उनके पारिवारिक सूत्रों ने यहां इसकी जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्यजनित समस्याओं की वजह से उनको सोमवार को एक व्यक्तिगत अस्पताल में दाखिल कराया गया था.

वहां उनको सोमवार आधी रात को दिल का दौरा पड़ गया. उनका निधन रात को लगभग 12.25 बजे हुआ. उनके परिवार में दो पुत्रियां हैं. चक्रवर्ती की पत्नी का इसी वर्ष जनवरी में निधन हुआ था.अविभाजित बंगाल के फरीदपुर में साल 1924 में पैदा होने वाले चक्रवर्ती बांग्ला साहित्य जगत की एक प्रमुख हस्ती थे. उनकी कविताओं की पहली पुस्तक ‘नील निरजने’ साल 1954 में 30 वर्ष की आयु में प्रकाशित हुई थी.

अपनी कविता उलंग राजा के लिए उनको साल 1974 में साहित्य अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. गंभीर रूप से बीमार होने से पहले तक वे साहित्यिक गतिविधियों में बहुत ज्यादा सक्रिय रहे थे. वे संपादक के तौर पर बांग्ला साहित्यिक पत्रिका राष्ट्र  बच्चों की पत्रिका आनंद मेला से सालों तक जुडे़ रहे थे. अभी बीते महीने ही उन्होंने एक पत्रिका के लिए अपनी आखिरी कविता लिखी थी जो अगले महीने कोलकाता पुस्तक मेले के मौके पर प्रकाशित होगी.

चक्रवर्ती ने अपने जीवनकाल में विभिन्न विषयों पर सैकड़ों आर्टिक्ल  12 उपन्यासों के अतिरिक्त 47 पुस्तकें लिखी थीं. उनमें से ज्यादातर पुस्तकें बच्चों के लिए थीं. पश्चिम बंगाल बांग्ला अकादमी के अध्यक्ष रहे चक्रवर्ती को आनंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. CM ममता बनर्जी ने चक्रवर्ती के निधन पर गहरा शोक जताया है. अपने एक ट्वीट में ममता ने बोला कि नीरेंद्रनाथ का जाना हम सबके लिए एक बड़ी क्षति है. बांग्ला साहित्य में अपने सहयोग के जरिए वे हमेशा हमारे बीच रहेंगे.इसके अतिरिक्त महानगर के कई जाने-माने कवियों और साहित्यकारों ने भी  चक्रवर्ती के निधन पर गहरा दुख जताया है.